१०० वर्षिय थारु साहित्यकार कामता प्रसाद चौधरीको सम्झनामा | Kamata Prasad Chaudhary

झुमरा गीत लाली रे चुन्दरी मेरे, ऊडि फहराइल हे। यहरी वहरी लयराय, रेशमी चुन्दरी ऊडि जाय मोर।। सर, सर, सर, सर चलल बयलिया हे। जिया मोर डगमग डोले, चुन्दरी ऊडे धिरे धिरे मोर।। फर फर फर फर ऊडल चुन्दरिया हे। महि हे बहुत दिक लागे, घुटघुट खोले खोले खोले मोर                               (२०३० साल, कविता संग्रह … Continue reading १०० वर्षिय थारु साहित्यकार कामता प्रसाद चौधरीको सम्झनामा | Kamata Prasad Chaudhary